जयपुर/जोबनेर। जोबनेर क्षेत्र में 8 अगस्त को हुए स्कूल बस हादसे में घायल छात्रा लक्षिता कुमावत की इलाज के दौरान मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। हादसे और स्कूल बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के आरोपों को लेकर ग्रामीणों ने निजी स्कूलों की बसों को रोककर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्कूल बसों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। जांच के दौरान भी बसों में क्षमता से अधिक बच्चे मिलने की बात सामने आई।

जानकारी के अनुसार, आईपीएस स्कूल (खेजड़ावास) की दो बसों को ग्रामीणों ने रोका। इनमें एक 42 सीटर बस में 98 बच्चे और दूसरी 52 सीटर बस में 97 बच्चे सवार मिले। वहीं ओरिशियन स्कूल (शांखला का बास) की 42 सीटर बस में क्षमता से काफी अधिक 75 बच्चे मिले। इसके अलावा राजीव स्कूल (खेजड़ावास) की 42 सीटर बस में भी 55 बच्चे बैठे मिले।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बसों में निर्धारित नियमों के अनुसार 'बाल वाहिनी' तक नहीं लिखा गया था और सामान्य व्यावसायिक वाहनों की तरह बच्चों को जोखिम में डालकर परिवहन किया जा रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि 42 सीटों वाली बस में 98 बच्चों को बैठाना बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही है।

गौरतलब है कि 8 अगस्त को तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सामने से आ रही स्कूल बस से टकरा गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूल बस पलट गई और उसमें सवार 18 बच्चे घायल हो गए। इनमें कुछ बच्चों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि कई बच्चों के पैरों में फ्रैक्चर हुआ। इसी हादसे में गंभीर रूप से घायल लक्षिता कुमावत का इलाज के दौरान निधन हो गया।

लक्षिता की मौत के बाद अब स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था और क्षमता से अधिक बच्चों के परिवहन पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से सभी निजी स्कूल बसों की सघन जांच, क्षमता के अनुसार बच्चों को बैठाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।