जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर आज राजस्थान हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को अदालत के सामने चुनावी तैयारियों की स्थिति और आगे की कार्ययोजना स्पष्ट करनी होगी। माना जा रहा है कि सुनवाई के बाद चुनाव कार्यक्रम को लेकर स्थिति काफी हद तक साफ हो सकती है।

पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की थी। अदालत ने राज्य सरकार के संबंधित विभागों और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए थे कि वे चुनाव कराने की पूरी रूपरेखा और प्रस्तावित कार्यक्रम के साथ अगली सुनवाई में उपस्थित हों।

सुनवाई के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह से उस प्रस्ताव पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसमें चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई थी। आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि यह प्रस्ताव राज्य सरकार के अनुरोध पर भेजा गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि आयोग समय पर चुनाव कराने के लिए पहले भी कई बार सरकार को पत्र लिख चुका है।

दूसरी ओर, ओबीसी राजनीतिक आरक्षण का मुद्दा भी इस मामले का अहम हिस्सा बना हुआ है। राज्य सरकार ने पहले अदालत को बताया था कि ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने के बाद आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करेगा। हालांकि हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश देते हुए आयोग को जल्द रिपोर्ट सौंपने और सरकार को बिना अनावश्यक देरी के आरक्षण संबंधी कार्यवाही पूरी करने को कहा है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला वर्ग के लिए आरक्षण तय करना राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र है। जैसे ही सरकार आरक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी करेगी, राज्य निर्वाचन आयोग बहुत कम समय में चुनाव कार्यक्रम जारी करने की स्थिति में होगा।

अब सभी की नजर आज होने वाली सुनवाई पर टिकी है। यदि अदालत के समक्ष सरकार और निर्वाचन आयोग चुनावी तैयारियों का स्पष्ट खाका पेश करते हैं, तो प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनावों की दिशा तय हो सकती है। सुनवाई के बाद चुनाव की संभावित तारीखों को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है.